आत्मनिर्भरता की ओर भारत

Columnist- Pooja Nanda

DATE- 17th May, 2020

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार 12 मई को लाॅक डाउन के तीसरे चरण में देश को एक बार संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने चार मुख्य बातों को आगे रखा।सबसे पहली बात, देश को आत्मनिर्भर बनना होगा। दूसरी बात, आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज दिया जाएगा। तीसरी बात, आत्म निर्भर बन बनने की राह में हमें लोकल प्रोडक्ट को अपनाना होगा। चौथी बात, लॉक डाउन का चौथा चरण भी आएगा, हालांकि यह नए रंग रूप और नए नियमों वाला होगा।
प्रधानमंत्री ने पूरे 33 मिनट तक देश को संबोधित किया।

गौरतलब है कि 12 मई का 33 मिनट का भाषण प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम पांचवा संबोधन था, जिसमें कि उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज घोषित किया। सबसे पहला 29 मिनट का संबोधन प्रधानमंत्री ने 19 मार्च को दिया था, जिसमें जनता कर्फ्यू की अपील की गई थी। दूसरा संबोधन 24 मार्च को 29 मिनट का था, जिसमें 21 दिन के लॉक डाउन का ऐलान किया गया था। तीसरा संबोधन 3 अप्रैल को 12 मिनट का वीडियो संदेश था। इसमें ही 9 मिनट लाइट बंद करने की अपील भी की गई थी। इसके बाद चौथा संबोधन 14 अप्रैल को 25 मिनट का भाषण था, जिसमें लॉक डाउन की अवधि 3 मई तक बढ़ा दी गई थी।

हालांकि आलोचकों को शिकायत है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उन प्रवासी मजदूरों का कोई जिक्र नहीं किया जो पिछले कुछ दिनों से दिक्कतों का सामना करते हुए देश के अलग-अलग हिस्सों से अपने घर की ओर जा रहे हैं। उन्होंने घोषणा के दौरान सिर्फ इतना कहा कि इसमें प्रवासी मजदूरों के लिए भी महत्वपूर्ण फैसले होंगे। परंतु केवल इतना सा जुमला शायद काफी नहीं था, आलोचकों के लिए। लेकिन मोदी जी तो मोदी जी हैं, जो कि अपने सभी पत्ते एक बार में ना खोलने  के लिए जाने जाते हैं।

गौरतलब है कि लॉक डाउन के दौर में  भारत दुनिया का पांचवा ऐसा देश बन गया है, जिसने अपनी जीडीपी का 10% या उससे ज्यादा हिस्सा आर्थिक पैकेज के तौर पर दिया है।

भारत से पहले जापान अपनी जीडीपी का 21%, अमेरिका 13%, स्वीडन 12% और जर्मनी 10.7% के बराबर का आर्थिक पैकेज घोषित कर चुका है।

यह पैकेज और भी ज्यादा दिलचस्प बन जाता है, जब हम यह जानते हैं कि यह पैकेज पाकिस्तान की कुल जीडीपी के बराबर है। एशिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन मुकेश अंबानी की कुल पर्सनल संपत्तियों का 5 गुना है। साथ ही साथ बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन की तुलना में यह 17% है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उन सभी लोगों के परिवार वालों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की, जो इस महामारी के दौर में अपनी जान गवां चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संकट बेशक बहुत बड़ा है लेकिन हमें थकना, हारना, टूटना या बिखरना नहीं है। इसलिए सावधान रहते हुए और जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए हमें बचना भी है और आगे भी बढ़ना है।

मोदी जी ने कहा कि हालांकि संकट बहुत बड़ा है, लेकिन हमारा संकल्प और भी मजबूत और विराट होगा। आत्मनिर्भर भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आपदा भारत के लिए एक संकेत, एक संदेश, एक अवसर लेकर आई है। जब कोरोनावायरस हुआ तो भारत में एक भी  पीपीई किट नहीं बनती थी और N95 मास्क भी नाममात्र को ही उत्पादित होते थे। लेकिन आज भारत में ही हर रोज 2 लाख पीपीई किट और 2 लाख N95 मास्क बनाए जा रहे हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि भारत ने आपदा को अवसर में बदल दिया। भारत के पास साधन, सामर्थ्य और दुनिया का बेहतरीन टैलेंट है। अब हम बेहतर प्रोडक्ट बनाएंगे अपनी क्वालिटी बेहतर करेंगे।

        मोदी जी ने कहीं तीन मुख्य बातें

1) आत्मनिर्भर भारत

2) आत्म निर्भर भारत के पांच स्तंभ

     * इकोनामी
       ऐसी इकोनामी जो इंक्रीमेंटल चेंज नहीं   बल्कि क्वांटम जंप लेकर आए।
      * इंफ्रास्ट्रक्चर
       एक ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर जो आधुनिक भारत की पहचान बने।
      * सिस्टम
    ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की तरीके से नहीं बल्कि 21 वी शताब्दी की नई टेक्नोलॉजी को अपनाएं।
       * डेमोग्राफी
      दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की डेमोग्राफी भारत को आत्मनिर्भर बना बनाने के लिए ऊर्जा का स्त्रोत बने।
       * डिमांड
डिमांड यानी मांग के चक्र और उसकी ताकत का इस्तेमाल किया जाना।

3) विशेष आर्थिक पैकेज

मांग बढ़ाने के लिए सप्लाई चेन का सशक्त होना बहुत जरूरी है। इसके लिए प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ रुपए का एक विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया, जो कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने की अभियान के तहत एक अहम कड़ी का काम करेगा। यह देश की विकास यात्रा को और आत्मनिर्भर भारत के अभियान को एक नया आयाम और तेज गति देगा।

यह आर्थिक पैकेज हमारे देश कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, लघु उद्योग और एमएसएमई को एक नई ऊंचाई तक ले कर जाएगा। देश का हर एक श्रमिक और किसान, जो हर परिस्थिति और मौसम में देशवासियों के लिए दिन-रात परिश्रम करते हैं, इस पैकेज से सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। भारत का मध्यम वर्ग, जो कि ईमानदारी से टैक्स देता है, यह पैकेज उनकी भी मदद करेगा।भारत के उद्योगपति, जो भारत को हमेशा आर्थिक बुलंदियों तक पहुंचाने के लिए अथक प्रयास करते हैं, यह पैकेज उनके लिए भी है।
इस पैकेज में देश के सभी वर्गों के लिए कुछ ना कुछ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोनावायरस ने हमें लोकल मैन्युफैक्चरिंग, लोकल सप्लाई चेन और लोकल मार्केटिंग का मतलब और महत्व समझा दिया है। ऐसे कठिन समय में लोकल ने ही हमारी जरूरतों को पूरा किया है और हमें बचाया है। अब इस लोकल को बचाना सबकी जिम्मेदारी है। और ऐसा तभी हो सकता है जब देश का हर एक नागरिक देश में बने उत्पादों को ही अधिक से अधिक प्रयोग करने का वचनबद्ध हो।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के संबंध में पहले दिन की गई घोषणाएं

आइये जानते हैं कि वित्त मंत्री द्वारा की गई घोषणा में किस सेक्टर को क्या मिला…..

वित्त मंत्री ने कहा कि—-

* लोकल ब्रांड को ग्लोबल पहचान दिलाना है।

* जनधन, आधार और मोबाइल से गरीब तबकों को बड़ी राहत मिली है।

*डीबीटी के जरिए लोगों के खाते में सीधे पैसे पहुंच रहे हैं, किसी को बैंक तक जाने की जरूरत भी नहीं पड़ रही है।

* उज्जवला योजना से महिलाओं को मुफ्त में गैस कनेक्शन मिला है।

* आरबीआई ने लोन में मध्यम वर्ग को राहत दी है।

* 30% लोन लेने वाले  ग्राहकों ने अप्रैल में मॉरिटोरियम लिया।

* सरकार पहले ही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज की घोषणा कर दी है।

*41 करोड़ बैंक खातों में 43 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा ट्रांसफर किए गए हैं।

* 71738 मीट्रिक टन दाल वितरित की गई है। 

* 18 हजार करोड़ रुपये का टैक्स रिफंड करदाताओं को दिया गया है।

* इससे 14 हजार करोड़ करदाताओं को लाभ मिलेगा।

* कुटीर लघु उद्योग के लिए छह कदम उठाने की सरकार ने की घोषणा.

* MSME के लिए 3 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान।

* कुटीर उद्योगों को बिना गिरवी के लोन मिलेगा।
इसके लिए कोई गारंटी देने की आवश्यकता नहीं है।

* यह लोन चार वर्ष के लिए मिलेगा और 12 महीने बाद चुकाना होगा।

* सरकार ने  Funda of Fund का प्रावधान किया है।

*मुश्किल परिस्थितियों में आए MSME के लिए विशेष योजना

* MSME की परिभाषा सरकार द्वारा बदल दी गई।

* सेवा क्षेत्र में कार्यरत MSME और मैन्युफैक्चरिंग एमएसएमई को एक समान दर्जा मिला।

* एक करोड़ का निवेश और पांच करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनी को सूक्ष्म उद्योग का दर्जा मिला।

* 10 करोड़ का निवेश और 50 करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनी को छोटे उद्योग का दर्जा मिला।

* मुश्किल में फंसे एमएसएमई को 20 हजार करोड़ रुपये की राहत दी गई।

* 200 करोड़ का सरकारी टेंडर ग्लोबर टेंडर नहीं होगा।

* MSME का जितना भी पिछ्ला भुगतान सरकार द्वारा किया जाना बाकी है,  वो 45 दिनों में कर दिया जाएगा।

* इन उद्योगों में कार्यरत कर्मचारियों के पीएफ खाते में, जिनकी सैलरी 15 हजार से कम है, उनके लिए सरकार अगले तीन महीनों के लिए अंशदान करेगी।

* जून, जुलाई और अगस्त 2020 का यानि तीन महीनों का 24 फीसदी पीएफ अंशदान कर्मचारियों और कंपनियों का सरकार वहन करेगी।

* पीएफ अंशदान को 12-12 फीसदी के बजाए 10-10 फीसदी किया गया है. हालांकि सरकारी कंपनियों में ऐसा प्रावधान नहीं किया गया है।

* NBFC के लिए 30 हजार करोड़ की लिक्विडिटी योजना लागू।

* पैसे की कमी के कारण संकट ग्रस्त NBFC को लोन देने के लिए सरकार गारंटर बनेगी।

* बिजली वितरण कंपनियों को 90 हजार करोड़ का फंड मिलेगा।

* पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और REC के जरिए  इन कंपनियों को लोन मिलेगा।

* आयकर रिटर्न को दाखिल करने की आखिरी तारीख को 30 नवंबर तक बढ़ाया गया दिया गया है।

* पहले रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई और 31 अक्तूबर थी।

* करदाताओं को बड़ी राहत प्रदान की गई।

* टीडीएस रेट में 25 फीसदी की कमी जो कि 14 मई से लागू होकर 31 मार्च 2021 तक माना जाएगा।

* इस प्रकार TDS और TCS देने वालों को 50,000 करोड़ की राहत मिलेगी।

* टैक्स ऑडिट की तारीख 31 अक्टूबर कर दी गई।

* रेरा में रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट को छह माह की राहत दी गई।

* Real Estate के लिए फोर्स मेज़र लागू किया जाएगा ,यानि उनको प्रोजेक्ट कंप्लीशन में समय की छूट मिलेगी।

* अब उनका कांट्रेक्ट खत्म नहीं माना जाएगा। 6 महीने के लिए उनका रजिस्ट्रेशन और कंप्लीशन टाइम बढ़ाया गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की दूसरे दिन की महत्त्वपूर्ण घोषणाएं:

20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की दूसरी किस्त का ऐलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 14 मई को किया गया। उन्होंने प्रवासी मजदूरों, फेरीवालों, छोटे कारोबारियों और किसानों और मिडिल क्लास के लिए घोषणाएं की हैं। किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए सस्ता कर्ज मुहैया कराया जाएगा। प्रवासी मजदूरों को 2 महीने तक मुफ्त राशन मिलेगा। मिडिल क्लास के लिए हाउसिंग लोन सब्सिडी योजना को एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। शहरी गरीबों और प्रवासी मजदूरों के लिए सस्ते किराये के घर उपलब्ध कराए जाएंगे।

* किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 2 लाख करोड़ रुपए की मदद जारी की जाएगी। 2.5 करोड़ किसानों को रियायती दर पर 2 लाख करोड़ रुपए का ऋण दिया जाएगा। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। मछुआरों और पशुपालकों को भी इसका लाभ मिलेगा। 

* नाबार्ड के द्वारा किसानों को 30 हजार करोड़ रुपए की मदद दी जाएगी। कृषि काल में किसानों ने जी तोड मेहनत करके उत्पादन किया है। छोटे और सीमांत किसानों को लाभ देने के लिए 30 हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त सुविधा दी जाएगी। यह धनराशि नाबार्ड के 90 हजार करोड़ रुपए के अतिरिक्त है। यह पैसा कोऑपरेटिव बैंकों के द्वारा सरकारों को दिया जाएगा। इससे तीन करोड़ किसान लाभान्वित होंगे।

* हाउसिंग लोन पर सब्सिडी योजना एक साल के लिए बढ़ा दी गई। हाउसिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए 6-18 लाख रुपए की वार्षिक आमदनी वाले मिडिल क्लास के लिए 2017 में लाए गए हाउसिंग लोन सब्सिडी योजना को 31 मार्च 2021 तक बढ़ा दिया गया है। इसके लिए 70 हजार करोड़ रुपए का पैकेज दिया गया है। एक साल में 2.5 लाख लोग इसका फायदा प्राप्त करेंगे। इससे हाउजिंग सेक्टर को लाभ होगा और नई नौकरियों के अवसर भी जन्म लेंगे।

* रेहड़ी पटरी वालों को 10 हजार तक लोन दिया जाएगा। इसके अन्तर्गत 50 लाख फेरीवालों को 5 हजार करोड़ रुपए की ऋण सहायता दी जाएगी। ये आसानी से 10 हजार रुपए तक का ऋण ले सकते हैं। ताकी लॉकडाउन खत्म होने के बाद वे अपना काम दोबारा शुरू कर सकें। मोबाइल से पेमेंट करने वाले ऐसे फेरीवालों को बढ़ावा दिया जाएगा और आने वाले समय में उन्हें अतिरिक्त लोन मिल सकेगा।

* शहरी गरीबों को सस्ते किराये पर घरों की व्यवस्था की जाएगी।  प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत सरकार प्रवासी मजदूरों और शहरी गरीबों के लिए रेंटल हाउसिंग स्कीम लागू करेगी। पीपीपी मॉडल पर किराये पर रहने के लिए घर बनाएं जाएंगे, जिनमें वे कम किराए में रह सकते हैं। इस प्रकार कम किराया खर्च करके शहर में रहना संभव होगा।  जो उद्योगपति अपनी जमीन पर ऐसे घर बनाएंगे, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। राज्य सरकारों के साथ मिलकर भी इस काम को किया जाएगा।

* आने वाले दो महीने तक सभी प्रवासी मजदूरों को बिना कार्ड के ही 5 किलो प्रति व्यक्ति गेहूं या चावल और एक किलो चना प्रति परिवार दिया जाएगा। इससे करीब 8 करोड़ प्रवासी मजदूर लाभान्वित होंगे। इस योजना पर लगभग 3500 करोड़ रुपए खर्च होंगे जो कि पूरी तरह से केंद्र सरकार उठाएगी। 

* वन नेशन वन राशन कार्ड को अगस्त 2020 तक लागू कर दिया जाएगा। इससे 23 राज्यों को 67 करोड़ लोग लाभ ले सकेंगे। पीडीएस योजना के 83 फीसदी लाभार्थी इससे जुड़ जाएंगे। मार्च 2021 तक इसमें 100 फीसदी लाभार्थी और जुड़ जाएंगे। देश के किसी भी कोने में लोग अपने राशन कार्ड से उचित मूल्य दुकान से राशन लेने में समर्थ होंगे।

* अभी केवल 30 प्रतिशत कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन मिल पाता है। सरकार लेबर कोड पर काम कर रही है, इसके अन्तर्गत सभी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन तय किया जाएगा। सभी राज्यों में न्यूनतम वेतन में अंतर को खत्म किया जाएगा। 10 से अधिक कर्मचारियों वाले सभी संस्थानों के लिए देश के सभी जिलों में ईएसआईसी सुविधा को लागू किया जाएगा। 10 से कम कर्मचारी वाले संस्थान भी स्वेच्छा से ईएसआईसी से जुड़ सकते हैं। सभी कर्मचारियों का साल में एक बार स्वास्थ्य परीक्षण कराना अनिवार्य होगा। स्थायी कर्मचारियों को एक साल में ही ग्रैच्युटी का लाभ मिलेगा जो कि वर्तमान समय में 5 साल की सेवा के बाद ही मिलता है। 

तीसरे दिन में वित्त मंत्री द्वारा की गई महत्वपूर्ण घोषणाएं:

* एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया। फसल कटाई, कोल्ड चेन, स्टोरेज सेंटर जैसी ‘फार्म गेट’ सुविधाएं मजबूत करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए की फाइनेंसिंग की जाएगी। एग्रीकल्चरल इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रायमरी एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव सोसायटी और खेती से जुड़े स्टार्ट-अप्स को यह मदद दी जाएगी। यह पैसा शॉर्ट टर्म लोन के जरिए मिलेगा। सरकार का कहना है कि तुरंत ही यह फंड बना लिया जाएगा।

*  माइक्रो फूड एंटरप्राइज के लिए 10 हजार करोड़ रुपए की मदद जारी। लोकल के लिए वोकल के नारे को ध्यान में रखते हुए माइक्रो फूड एंटरप्राइज को 10 हजार करोड़ रुपए की मदद दी जाएगी ताकि वे फूड स्टैंड्‌डर्स का ध्यान रखते हुए ब्रांडिंग और मार्केटिंग कर सकें। ऐसी 2 लाख यूनिट्स को इसका फायदा मिलेगा। कश्मीर का केसर हो, उत्तर प्रदेश का आम हो, पूर्वोत्तर का बांस हो, आंध्र प्रदेश की मिर्ची हो या बिहार का मखाना हो, इस तरह के उद्यमों को इसमें मदद मिलेगी। कृषि उपज संस्थाओं, सेल्फ हेल्प ग्रुप्स और सहकारी संस्थाओं के जरिए यह मदद दी जाएगी।

* मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए 20 हजार करोड़ रुपए मंजूर किए गए। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के जरिए 20 हजार करोड़ रुपए की मदद मिलेगी। इसमें 11 हजार करोड़ रुपए मछली पालन और 9 हजार करोड़ रुपए बुनियादी सुविधाएं मजबूत करने के लिए मिलेंगे। यह योजना मछुआरों के लिए है ताकि उन्हें मछली पालन में मदद मिल सके। द्वीप वाले राज्यों, हिमालयी राज्यों, पूर्वोत्तर और मछली पालन में आगे रहने वाले जिलों को यह मदद मिलेगी।मंडियों, हार्बर और कोल्ड चेन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर पैसा खर्च होगा। 55 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। 1 लाख करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट हो सकेगा। सरकार को आशा है कि इससे 5 साल में 70 लाख टन ज्यादा मछली पालन हो सकेगा।

* पशुओं के टीकाकरण के लिए 13 हजार 343 करोड़ रुपए की मदद जारी की गई। गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूअरों काे टीका लगाया जाएगा। इस पर 13 हजार 343 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 53 करोड़ पशुओं को ये टीके लगाए जाएंगे।  इन्हें पालने वालों को सरकार मदद देगी। जिन पशुओं को पाला जाता है, उन्हें मुंह और खुर की बीमारियां न हों, इसके लिए टीके लगाए जाएंगे। अभी तक 1.5 करोड़ गाय-भैंस को यह टीका लगाया जा चुका है।

*  पशुपालन सेक्टर में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 15 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया गया। पशुपालन सेंटरों के लिए बुनियादी ढांचा बनाया जाएगा। इस पर 15 हजार करोड़ रुपए तक का खर्च आएगा। इससे डेयरी चलाने वाले लाभान्वित होंगे। इस पैसे से दूध के लिए प्रोसेसिंग इंडस्ट्री लगेंगी और डेयरी सेक्टर में निजी इन्वेस्टमेंट हो पाएगा। पशुओं को रखने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा। लोकल मार्केट और एक्सपोर्ट के लिए भी पैसा इस्तेमाल किया जाएगा। अगर एक्सपोर्ट करना चाहते हैं तो प्लांट के लिए इंसेंटिव भी मिलेगा।

* औषधीय पौधों के लिए 4 हजार करोड़ रुपए तय किए गए। हर्बल उत्पादन के लिए 4 हजार करोड़ रुपए का बजट होगा। मेडिसिनल प्लांट की खेती करने वाले किसानों को इसका फायदा मिलेगा। 10 लाख हेक्टेयर यानी करीब 25 लाख एकड़ में खेती करनी संभव होगी। यह खेती करने पर किसानों की 5 हजार करोड़ रुपए की आमदनी होगी। क्षेत्रीय मंडियों पर पैसा खर्च होगा। गंगा किनारे भी औषधीय पौधे लगाने की मुहिम चलाई जाएगी। गंगा किनारे ऐसे पौधों का 800 हेक्टेयर का कॉरिडाेर बनाया जाएगा। अगले दो साल में यह पैसे खर्च होंगे।

* मधुमक्खी पालने वालों के लिए 500 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस तरह शहद का उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को आमदनी का अतिरिक्त जरिया मिलेगा। मधुमक्खी पालन में लगे 2 लाख लोग इससे लाभान्वित होंगें। महिलाओं को इसमें ज्यादा मौका दिया जाएगा। इस योजना से शहद के एकत्र करना, स्टोरेज और मार्केटिंग में मदद मिलेगी।

* TOP यानी टमाटर, आलू, प्याज योजना में अब बाकी सब्जियां और फल भी शामिल किए जाएंगे। टमाटर, आलू और प्याज के मामले में ऑपरेशन ग्रीन चलता है ताकि किसानों को इसका ठीक पैसा मिले। अब यह योजना फल और सब्जियों पर भी लागू होगी। इससे उन किसानों को फायदा मिलेगा, जो आलू, प्याज और टमाटर के अलावा फल और सब्जियां भी उगाते हैं, लेकिन जिन्हें कई बार इनके सही दाम नहीं मिल पाते। इसके लिए 500 करोड़ रुपए का बजट है। 50% सब्सिडी ट्रांसपोर्टेशन और 50% सब्सिडी स्टोरेज और कोल्ड स्टोरेज पर दी जाएगी। यह छह महीने का पायलट प्रोजेक्ट होगा।

* आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव किया जाएगा। खेती में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और किसानों को अच्छे दाम दिलाने के लिए 1955 के आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव किया जाएगा। तिलहन, दलहन, आलू, प्याज उगाने वाले किसानों और खाने का तेल बेचने वालों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। इन्हें रेगुलेशन के दायरे से बाहर किया जाएगा। इन चीजों के लिए किसानों पर कोई स्टॉक लिमिट नहीं लगाई जाएगी। प्रोसेसर और वैल्यू चेन में शामिल लोगों के लिए स्टॉक लिमिट नहीं होगी। स्टॉक लिमिट सिर्फ राष्ट्रीय आपदा जैसे असाधारण मामलों में ही लागू की जाएगी।

* एग्रीकल्चर मार्केटिंग संशोधन किया जाएगा। एक केंद्रीय कानून बनेगा ताकि किसानों को अच्छी कीमतों पर उपज बेचने का मौका मिले।
इससे उन किसानों काे फायदा होगा जो अब तक लाइसेंस रखने वाली एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर मार्केट कमेटी में ही अपनी उपज बेच पाते थे। अब किसान दूसरे राज्यों में जाकर भी बेरोकटोक कृषि उपज बेच सकेंगे और ई-ट्रेडिंग भी कर सकेंगे।

*  किसानों के लिए कानून में बदलाव होंगे
किसानों को अभी फसल बोते वक्त यह नहीं पता होता कि उसे इसके कितने दाम मिलेंगे और पूरी उपज बिकेगी भी या नहीं। सरकार चाहती है कि हर सीजन से पहले किसानों को यह पता रहे कि उसे अपनी उपज का कितना दाम मिलेगा। किसानों को आमदनी की गारंटी देने के लिए सरकार कानून में बदलाव कर ऐसी व्यवस्था बनाएगी, जिसके अंतर्गत फूड प्रोसेसर, एग्रीगेटर्स, रिटेलर्स और एक्सपोर्टर्स के साथ किसान अपनी उपज का दाम पहले ही तय कर लेगा। इस  तरह मेहनती किसान उत्पीडित नही होगें और वे जोखिम रहित खेती करने में सक्षम होंगे।

चौथे दिन वित्त मंत्री द्वारा की गई घोषणाऐं:

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार 16 मई को 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की चौथी किस्त जारी की। वित्त मंत्री ने कोयला क्षेत्र के लिए 50 हजार करोड़ रुपये के फंड की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने एयरपोर्ट, डिफेंस सेक्टर में एफडीआई, स्पेस सेक्टर समेत कुल आठ घोषणाएं की।

कोयला क्षेत्र

* कोल बेड मिथेन की भी नीलामी की जाएगी।

* सरकार द्वारा कोयला परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए 50,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

* 50 नए कोयला खादानों की नीलामी की जाएगी।

* इसके लिए पात्रता की ऐसी कोई शर्तें नहीं होगी,  बल्कि चुनाव पेमेंट के आधार पर होगा।

* कोयला खनन में राजस्व की भी कुछ हिस्सेदारी होगी।

खनिज क्षेत्र

* खनिज क्षेत्र में भी आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

* 500 खनन ब्लॉक की नीलामी की जाएगी।

* कोयले और बॉक्साइट के खदानों की नीलामी एक साथ ही की जाएगी।

डिफेंस क्षेत्र

* डिफेंस में विदेशी निवेश की सीमा को अब 49 प्रतिशत से बढाकर 74 प्रतिशत कर दिया गया है।

* रक्षा खरीद के लिए समय सीमा निर्धारित की जाएगी।

* डिफेंस में कुछ खास उपकरणों के आयात की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए प्रत्येक वर्ष एक सूची जारी की जाएगी।

* हथियार फैक्ट्री बोर्ड्स को कॉरपोरेट बनाया जाएगा लेकिन इसका निजीकरण नहींं होगा।

* CIVIL AVIATION में सुधार किए जाएंगे।

* एयर स्पेस मैनेजमेंट किया जाएगा।

* केवल 60% हवाई क्षेत्र ही नागरिक विमानों के लिए उपलब्ध हैं इसलिए लंबे रूट लेने पड़ते हैं और ईंधन ज्यादा खर्च होता है। दो महीने के अंदर इस मसले को सुलझाया जाएगा।

* इससे विमानन क्षेत्र को 1000 करोड़ का फायदा होगा और यात्री अपेक्षाकृत जल्दी अपनी मंजिल तक पहुंच पाएंगे। ईंधन की बचत होगी और पर्यावरण में भी सुधार होगा।

* 6 नए एयरपोर्टो की नीलामी की जाएगी। और यह नीलामी पीपीपी मॉडल पर आधारित होगी।

* निजी क्षेत्रों द्वारा 12 मौजूदा एयरपोर्टों में अतिरिक्त निवेश किया जाएगा। साथ ही MRO HUB-भारत को विमानों की मरम्मत और रखरखाव का हब बना दिया जाएगा। इससे सभी एयरलाइंस का मेंटेनेंस ख़र्च पहले से कम हो जाएगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा पांचवे और अंतिम दिन की गई घोषणाऐं:

पहले चार दिनों में चार किस्तों में सरकार करीब 11 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा कर चुकी है।

प्रधानमंत्री द्वारा जारी किए गए पैकेज की घोषणाओं के पांचवें और अंतिम दिन 17 मई को वित्त मंत्री ने जो आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण निर्णय सुनाये, वो इस प्रकार हैं:

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की अंतिम किस्त में भी सुधारों पर ही जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस किस्त में मनरेगा, स्वास्थ्य एवं शिक्षा, कारोबार, कंपनी अधिनियम के उल्लंघनों को गैर-आपराधिक बनाने, कारोबार की सुगमता, सार्वजनिक उपक्रम और राज्य सरकारों से जुड़े संसाधनों पर ध्यान दिया गया है।  इससे पहले जारी की गई चार किस्तों में सरकार लगभग 11 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा कर चुकी है।

गौरतलब है कि प्रोत्साहन पैकेज की  पहली किस्त में 5.94 लाख करोड़ रुपये, दूसरी किस्त में 3.10 लाख करोड़ रुपये, तीसरी किस्त में 1.50 लाख करोड़ रुपये और चौथी एवं पांचवीं किस्त में 48,100 करोड़ रुपये के उपायों की घोषणायें सरकार द्वारा की गईं हैं। रिजर्व बैंक के मौद्रिक उपायों, मार्च की सरकार की घोषणाओं और पांच किस्तों को मिलाकर प्रोत्साहन पैकेज का आकार 20,97,530 करोड़ रुपये हो चुका है। इस तरह यह राशि घोषित राशि 20 लाख करोड़ से भी ज्यादा हो गई है।

* वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहत पैकेज की अंतिम किश्त घोषित करते हुए कहा कि जल्द ही निकट भविष्य में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए एक नई ‘अनुकूल’ नीति लाई जाएगी। इसके अनुसार ही रणनीतिक क्षेत्रों को एक नई परिभाषा दी जाएगी, जिसमें सार्वजनिक उपक्रमों की अधिकतम संख्या चार होगी। इसके साथ ही जिन क्षेत्रों में जनकल्याण के उद्देश्य से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) की उपस्थिति की आवश्यकता है, उन्हें अधिसूचित किया जाएगा।

* राज्यों की कर्ज उठाने की सीमा उनके सकल घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत से बढ़ाकर 2020-21 में पांच प्रतिशत कर दी गई है।  इस तरह उन्हें 4.28 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त धन उपलब्ध हो पाएगा।

*रणनीतिक क्षेत्रों से बाहर के सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण कर दिया जाएगा। सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के लिये नयी नीति बनाई जाएगी। रणनीतिक क्षेत्रों को ठीक तरह से परिभाषित किया जाएगा, जिनमें पीएसयू होंगे। अन्य क्षेत्रों के पीएसयू का निजीकरण या फिर विलय कर दिया जाएगा।

* दिवाला प्रक्रिया आरंभ  करने के लिए कम से कम चूक की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दी गई है। इससे एमएसएमई क्षेत्र बड़े स्तर पर लाभान्वित होगा। एक साल तक दिवाला संबंधी कोई नयी प्रक्रिया नहीं की जाएगी। कोविड-19 से जुड़े कर्ज को चूक की परिभाषा के अन्तर्गत नहीं लाया जाएगा।

* सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में होने वाले खर्च को एक बड़ा विस्तार दिया जाएगा। सभी जिलों में संक्रामक रोग सेंटर बनाए जाएंगे। ब्लॉक स्तर पर विस्तृत संख्या में लैब स्थापित की जाएंगी। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्थ और वेलनेस केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

* पूरे देश में लैब नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। महामारी को रोकने और नियंत्रण में लाने  के लिए सभी जिलों और ब्लॉक स्तर पर एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य लैब (Public Health Lab) की स्थापना की जाएंगी।

* प्रधानमंत्री विद्या योजना के अन्तर्गत बहुत जल्दी ऑनलाइन एजुकेशन के लिए बड़े और महत्वपूर्ण निर्णय लिएजाएंगे। इसके अन्तर्गत प्रत्येक राज्य में स्कूलों को QR कोड वाली टेक्सटबुक उपलब्ध कराई जाएगी।  वन नेशन, वन डिजिटल प्लेटफॉर्म के अंतर्गत सभी कक्षाओं के पाठ्यक्रम को ऑनलाइन उपलब्ध करवाया जाएगा।

* प्रत्येक कक्षा के लिए एक अलग चैनल बनाया जाएगा। शिक्षा के लिए रेडियो, कम्युनिटी रेडियो और पॉडकास्ट का भी प्रयोग किया जाएगा। दिव्यांग छात्रों के लिए इ-कंटेंट की सुविधा भी उपलब्ध करवाई  जाएगी



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